नई दिल्ली। मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को पाकिस्तान की स्थानीय अदालत ने जो सजा दी है, उससे भारत संतुष्ट नहीं है। भारत मानता है कि यह सिर्फ दिखावे की कार्रवाई है, जो पाकिस्तान की सरकार ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कार्रवाई से बचने के लिए की है। पाकिस्तान सरकार की तरफ से इस बात के संकेत नहीं दिए गए हैं कि वह आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए वाकई गंभीर है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान जब तक अपने यहां आतंकी ढांचे को नष्ट नहीं करता है और मुंबई हमले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कदम नहीं उठाता है, तब तक उसे गंभीर नहीं माना जा सकता। हाफिज सईद को सजा भी वित्तीय कार्यवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की बैठक को ध्यान में रख कर दी गई है। बताते चलें कि पाकिस्तान की एक अदालत ने भारत में कई आतंकी हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद को दो मामलों में दोषी ठहराते हुए 11 साल जेल की सजा सुनाई है।
यह सजा उसे ऐसे समय में दी गई है, जब तीन दिन बाद रविवार से पेरिस में एफएटीएफ की बैठक शुरू होने वाली है। यह संगठन दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने व भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए काम करता है। इसने वर्ष 2018 में ही पाकिस्तान को 20 कामों की सूची सौंपी थी। आतंकी गतिविधियों से जुड़े संगठनों की वित्तीय सहायता पर रोक लगाने के मामले में पाकिस्तान के बेहद खराब रिकार्ड को देखते हुए उसे उन कार्यों की सूची सौंपी गई थी।
अभी पाकिस्तान इसकी निगरानी सूची में है। माना जाता है कि आगामी बैठक में प्रतिबंधित होने वाले देशों की सूची से बचने के लिए ही पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी सईद को सजा सुनाने का रास्ता निकाला है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि एफएटीएफ की बैठक से पहले इस तरह का फैसला करने की वजह से अभी यह साफ होना शेष है कि पाकिस्तान कितना गंभीर है। अभी यह भी देखना है कि वह दूसरे आतंकियों के खिलाफ गंभीरता दिखाता है या नहीं। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि वह उसके यहां आतंकी हमला कराने वाले सारे आतंकियों को सजा दे।